Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.141.88: विश्वामित्र बोले, "चाण्डाल! मैं मानता हूँ कि तुमसे दान लेकर इस अभक्ष्य वस्तु को खाने में दोष है। तथापि जहाँ न खाने से प्राण जाने की सम्भावना हो, वहाँ शास्त्रों में सदैव अपवाद हैं। उसमें हिंसा या असत्य का दोष नहीं है, केवल निन्दा का थोड़ा-सा दोष है। प्राण जाने के अवसर पर भी अभक्ष्य वस्तु खाने का निषेध करने वाले वचन बहुत महत्त्वपूर्ण या आदरणीय नहीं हैं।" 88 | mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्वामित्र बोले, "चाण्डाल! मैं मानता हूँ कि तुमसे दान लेकर इस अभक्ष्य वस्तु को खाने में दोष है। तथापि जहाँ न खाने से प्राण जाने की सम्भावना हो, वहाँ शास्त्रों में सदैव अपवाद हैं। उसमें हिंसा या असत्य का दोष नहीं है, केवल निन्दा का थोड़ा-सा दोष है। प्राण जाने के अवसर पर भी अभक्ष्य वस्तु खाने का निषेध करने वाले वचन बहुत महत्त्वपूर्ण या आदरणीय नहीं हैं।" 88
Vishwamitra said, "Chandal! I agree that there is a fault in accepting donation from you and eating this inedible thing. However, where there is a possibility of losing life by not eating, there are always exceptions in the scriptures. There is no fault of violence or untruth in it, there is only a little fault of slander. The words which prohibit eating inedible things even on the occasion of losing life are not very important or respectable." 88.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥