Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.141.87: चाण्डाल ने कहा, "आत्मा ही साक्षी है कि कौन-सा कर्म किस कुल के लिए धर्म है। आप अभक्ष्य भोजन करने में जो पाप है, उसे भी जानते हैं। मेरी राय में, जो कुत्ते के मांस को भक्ष्य कहकर उसका आदर करता है, उसके लिए इस संसार में त्याज्य कुछ भी नहीं है।" 87 | mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्वपच उवाच
आत्मैव साक्षी कुलधर्मकृत्ये
त्वमेव जानासि यदत्र दुष्कृतम्।
यो ह्याद्रियाद् भक्ष्यमिति श्वमांसं
मन्ये न तस्यास्ति विवर्जनीयम्॥ ८७॥
अनुवाद
चाण्डाल ने कहा, "आत्मा ही साक्षी है कि कौन-सा कर्म किस कुल के लिए धर्म है। आप अभक्ष्य भोजन करने में जो पाप है, उसे भी जानते हैं। मेरी राय में, जो कुत्ते के मांस को भक्ष्य कहकर उसका आदर करता है, उसके लिए इस संसार में त्याज्य कुछ भी नहीं है।" 87
The Chandala said, "The soul alone is the witness as to which deed is dharma for which family. You also know the sin involved in eating inedible things. In my opinion, for one who respects the meat of a dog by calling it edible, there is nothing to be discarded in this world." 87
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥