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mahabharat 12.141.81: चाण्डाल ने कहा, "कुत्ते का मांस खाना तुम्हारे लिए अत्यन्त दुःखदायी पाप है। तुम्हें इससे बचना चाहिए। यह मेरा दृढ़ मत है, इसीलिए मैं महान पापी तथा अब्राह्मण होते हुए भी तुम्हें बार-बार फटकार रहा हूँ। यह निश्चय ही धर्म का उपदेश देने का मेरा एक धूर्त प्रयास है।" 81.   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  12.141.81 
श्वपच उवाच
गोपनीयमिदं दु:खमिति मे निश्चिता मति:।
दुष्कृतोऽब्राह्मण: सत्रं यस्त्वामहमुपालभे॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
चाण्डाल ने कहा, "कुत्ते का मांस खाना तुम्हारे लिए अत्यन्त दुःखदायी पाप है। तुम्हें इससे बचना चाहिए। यह मेरा दृढ़ मत है, इसीलिए मैं महान पापी तथा अब्राह्मण होते हुए भी तुम्हें बार-बार फटकार रहा हूँ। यह निश्चय ही धर्म का उपदेश देने का मेरा एक धूर्त प्रयास है।" 81.
 
The Chandala said, "Eating dog's meat is a very painful sin for you. You should avoid it. This is my firm opinion, that is why I am repeatedly reprimanding you despite being a great sinner and a non-brahmin. It is certainly a cunning attempt on my part to preach Dharma. 81.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)