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mahabharat 12.141.8: परंतप! जब प्रजा पापी हो जाती है, तब राजा को किस प्रकार आचरण करना चाहिए, जिससे वह धर्म और अर्थ से भी भ्रष्ट न हो जाए?॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.141.8 
कथं च राजा वर्तेत लोके कलुषतां गते।
कथमर्थाच्च धर्माच्च न हीयेत परंतप॥ ८॥
 
 
अनुवाद
परंतप! जब प्रजा पापी हो जाती है, तब राजा को किस प्रकार आचरण करना चाहिए, जिससे वह धर्म और अर्थ से भी भ्रष्ट न हो जाए?॥8॥
 
Parantapa! When people become sinful, how should the king behave in such a situation, so that he does not get corrupted from Dharma and Artha as well?॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)