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कथं च राजा वर्तेत लोके कलुषतां गते।
कथमर्थाच्च धर्माच्च न हीयेत परंतप॥ ८॥
अनुवाद
परंतप! जब प्रजा पापी हो जाती है, तब राजा को किस प्रकार आचरण करना चाहिए, जिससे वह धर्म और अर्थ से भी भ्रष्ट न हो जाए?॥8॥
Parantapa! When people become sinful, how should the king behave in such a situation, so that he does not get corrupted from Dharma and Artha as well?॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥