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mahabharat 12.141.79: विश्वामित्र बोले, "यदि मैं उपवास करके प्राण त्याग दूँ, तो मृत्यु के बाद क्या होगा? यह संदिग्ध बात है; परंतु ऐसा करने से पुण्य कर्म नष्ट हो जाएँगे, इसमें संशय नहीं है (क्योंकि शरीर ही धर्माचरण का आधार है)। अतः प्राण बचाकर मैं प्रतिदिन व्रत रखकर तथा संयम और संयम में तत्पर रहकर अपने पापों का प्रायश्चित करूँगा। इस समय धर्म के आधार शरीर की रक्षा करना आवश्यक है; अतः मैं इस अभक्ष्य पदार्थ को खाऊँगा।"   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  12.141.79 
विश्वामित्र उवाच
स्थाने भवेत् संशय: प्रेत्यभावे
नि:संशय: कर्मणां वै विनाश:।
अहं पुनर्व्रतनित्य: शमात्मा
मूलं रक्ष्यं भक्षयिष्याम्यभक्ष्यम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र बोले, "यदि मैं उपवास करके प्राण त्याग दूँ, तो मृत्यु के बाद क्या होगा? यह संदिग्ध बात है; परंतु ऐसा करने से पुण्य कर्म नष्ट हो जाएँगे, इसमें संशय नहीं है (क्योंकि शरीर ही धर्माचरण का आधार है)। अतः प्राण बचाकर मैं प्रतिदिन व्रत रखकर तथा संयम और संयम में तत्पर रहकर अपने पापों का प्रायश्चित करूँगा। इस समय धर्म के आधार शरीर की रक्षा करना आवश्यक है; अतः मैं इस अभक्ष्य पदार्थ को खाऊँगा।"
 
Vishwamitra said, "If I give up my life by fasting, what will happen after death? This is a doubtful matter; but by doing this, the good deeds will be destroyed, there is no doubt about this (because the body is the basis of religious conduct). Therefore, after saving my life, I will atone for my sins by fasting and being ready to observe self-control and restraint every day. At this time, it is necessary to protect the body, which is the basis of religion; therefore, I will eat this inedible substance. 79.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)