Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.141.77: विश्वामित्र बोले, "यदि अगस्त्य ने ब्राह्मणों की रक्षा के लिए ऐसा किया, तो मैं भी अपने मित्र की रक्षा के लिए ऐसा करूँगा।" इस ब्राह्मण का शरीर मेरा मित्र है। यह मेरे लिए संसार का सबसे प्रिय और पूजनीय व्यक्ति है। मैं इसे जीवित रखने के लिए इस कुत्ते की जाँघ लेना चाहता हूँ। इसलिए, मैं ऐसे क्रूर कर्मों से तनिक भी नहीं डरता। 77.   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  12.141.77 
विश्वामित्र उवाच
मित्रं च मे ब्राह्मणस्यायमात्मा
प्रियश्च मे पूज्यतमश्च लोके।
तं धर्तुकामोऽहमिमां जिहीर्षे
नृशंसानामीदृशानां न बिभ्ये॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र बोले, "यदि अगस्त्य ने ब्राह्मणों की रक्षा के लिए ऐसा किया, तो मैं भी अपने मित्र की रक्षा के लिए ऐसा करूँगा।" इस ब्राह्मण का शरीर मेरा मित्र है। यह मेरे लिए संसार का सबसे प्रिय और पूजनीय व्यक्ति है। मैं इसे जीवित रखने के लिए इस कुत्ते की जाँघ लेना चाहता हूँ। इसलिए, मैं ऐसे क्रूर कर्मों से तनिक भी नहीं डरता। 77.
 
Vishwamitra said, "If Agastya did that to protect the Brahmins, I will also do it to protect my friend." This Brahmin's body is my friend. He is the most dear and respected person in the world for me. I want to take this dog's thigh to keep him alive. Therefore, I am not afraid of such cruel acts at all. 77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)