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mahabharat 12.141.74: चाण्डाल ने कहा, "यदि किसी तपस्वी ने कोई गलत काम किया है, तो वह सनातन धर्म नहीं माना जाएगा; इसलिए तुम्हें कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जो यहाँ नहीं करना चाहिए। किसी भी बहाने से पाप करने का सहारा मत लो।"   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.74 
श्वपच उवाच
असता यत् समाचीर्णं न च धर्म: सनातन:।
नाकार्यमिह कार्यं वै मा छलेनाशुभं कृथा:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
चाण्डाल ने कहा, "यदि किसी तपस्वी ने कोई गलत काम किया है, तो वह सनातन धर्म नहीं माना जाएगा; इसलिए तुम्हें कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जो यहाँ नहीं करना चाहिए। किसी भी बहाने से पाप करने का सहारा मत लो।"
 
The Chandala said, "If an ascetic person has committed any wrong deed, then it will not be considered Sanatan Dharma; therefore, you should not do any deed which should not be done here. Do not resort to committing sins by taking any excuse."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)