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mahabharat 12.141.72: चाण्डाल ने कहा, "मुनि! आप कुछ और भिक्षा ले आइए। इसे स्वीकार करना आपके लिए उचित नहीं है। आप चाहें तो इस कुत्ते की जांघ ले सकते हैं; परन्तु मैं निश्चयपूर्वक कहता हूँ कि आपको इसे नहीं खाना चाहिए।" 72.   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.72 
श्वपच उवाच
भिक्षामन्यामाहरेति न च कर्तुमिहार्हसि।
न नूनं कार्यमेतद् वै हर कामं श्वजाघनीम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
चाण्डाल ने कहा, "मुनि! आप कुछ और भिक्षा ले आइए। इसे स्वीकार करना आपके लिए उचित नहीं है। आप चाहें तो इस कुत्ते की जांघ ले सकते हैं; परन्तु मैं निश्चयपूर्वक कहता हूँ कि आपको इसे नहीं खाना चाहिए।" 72.
 
The Chandala said, "Muni, bring some other alms. It is not proper for you to accept this. If you wish, you may take this dog's thigh; but I say with certainty that you should not eat it." 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)