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mahabharat 12.141.7: हे मनुष्यों के स्वामी! पितामह! यदि कोई ब्राह्मण ऐसे संकट के समय दया करके अपने पुत्र-पौत्रों का परित्याग न करना चाहे, तो कृपया मुझे बताइए कि वह किस प्रकार जीविका चलाए।   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.7 
अतितिक्षु: पुत्रपौत्राननुक्रोशान् नराधिप।
कथमापत्सु वर्तेत तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! पितामह! यदि कोई ब्राह्मण ऐसे संकट के समय दया करके अपने पुत्र-पौत्रों का परित्याग न करना चाहे, तो कृपया मुझे बताइए कि वह किस प्रकार जीविका चलाए।
 
O Lord of men! Grandfather! If a Brahmin does not wish to abandon his sons and grandsons out of compassion in such a time of crisis, then please tell me how he should earn his livelihood. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)