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mahabharat 12.141.69: विश्वामित्र बोले—श्वपाक! सारे देश में अकाल पड़ा है; अतः मेरा दृढ़ विश्वास है कि अन्य कोई मांस उपलब्ध नहीं होगा। मेरे पास अन्न खरीदने के लिए धन नहीं है, भूख के मारे मेरा बुरा हाल है। मैं असहाय और निराश हूँ। मुझे लगता है कि इस कुत्ते के मांस में ही मुझे छह स्वादों वाले भोजन का आनंद मिल जाएगा।   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.141.69 
विश्वामित्र उवाच
न दुर्भिक्षे सुलभं मांसमन्यत्
श्वपाक मन्ये न च मेऽस्ति वित्तम्।
क्षुधार्तश्चाहमगतिर्निराश:
श्वमांसे चास्मिन् षड्रसान् साधु मन्ये॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र बोले—श्वपाक! सारे देश में अकाल पड़ा है; अतः मेरा दृढ़ विश्वास है कि अन्य कोई मांस उपलब्ध नहीं होगा। मेरे पास अन्न खरीदने के लिए धन नहीं है, भूख के मारे मेरा बुरा हाल है। मैं असहाय और निराश हूँ। मुझे लगता है कि इस कुत्ते के मांस में ही मुझे छह स्वादों वाले भोजन का आनंद मिल जाएगा।
 
Vishwamitra said—Shvapaak! There is famine in the whole country; hence I firmly believe that no other meat will be available. I do not have money to buy food, I am in a bad condition due to hunger. I am helpless and hopeless. I think that I will get the pleasure of six-taste food in this dog's meat only. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)