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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  12.141.65 
यथा यथैव जीवेद्धि तत् कर्तव्यमहेलया।
जीवितं मरणाच्छ्रेयो जीवन् धर्ममवाप्नुयात्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही जीवन सुरक्षित हो, उसे बिना किसी लापरवाही के कर देना चाहिए। मरने से जीना बेहतर है, क्योंकि जीवित व्यक्ति पुनः धर्म का पालन कर सकता है।
 
‘As soon as life is safe, it should be done without neglect. It is better to live than to die, because a living man can practice Dharma again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)