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श्लोक  12.141.62 
निराहारस्य सुमहान् मम कालोऽभिधावत:।
न विद्यतेऽप्युपायश्च कश्चिन्मे प्राणधारणे॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
मैं भोजन पाने के लिए इधर-उधर भाग रहा हूँ क्योंकि मुझे भोजन नहीं मिल रहा है। इस प्रयास में बहुत समय बीत गया है, लेकिन अभी तक मुझे अपने प्राण बचाने का कोई उपाय नहीं मिला है।
 
'I am running here and there to get food because I am not getting it. A long time has passed in this effort, but till now I have not found any way to save my life. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)