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mahabharat 12.141.60: ‘तुम शास्त्रविहित धर्म को जानते हो, इसलिए तुम्हें संकर धर्म का प्रचार नहीं करना चाहिए। धर्म का परित्याग मत करो; क्योंकि तुम धर्मात्माओं में श्रेष्ठ माने गए हो।’॥60॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.141.60 
जानता विहितं धर्मं न कार्यो धर्मसंकर:।
मा स्म धर्मं परित्याक्षीस्त्वं हि धर्मभृतां वर:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
‘तुम शास्त्रविहित धर्म को जानते हो, इसलिए तुम्हें संकर धर्म का प्रचार नहीं करना चाहिए। धर्म का परित्याग मत करो; क्योंकि तुम धर्मात्माओं में श्रेष्ठ माने गए हो।’॥60॥
 
‘You know the Dharma prescribed by the scriptures, therefore you should not propagate the hybridity of Dharma. Do not abandon Dharma; because you are considered to be the best among the righteous.’॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)