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mahabharat 12.141.55-56h: तब चाण्डाल ने उनसे कहा, 'महर्षि! मैं जो कहता हूँ उसे सुनो और उसे सुनकर ऐसा काम करो जिससे तुम्हारा धर्म नष्ट न हो।'   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  12.141.55-56h 
तमुवाच स चाण्डालो महर्षे शृणु मे वच:॥ ५५॥
श्रुत्वा तत् त्वं तथाऽऽतिष्ठ यथा धर्मो न हीयते।
 
 
अनुवाद
तब चाण्डाल ने उनसे कहा, 'महर्षि! मैं जो कहता हूँ उसे सुनो और उसे सुनकर ऐसा काम करो जिससे तुम्हारा धर्म नष्ट न हो।'
 
Then the Chandala said to him, 'Maharishi! Listen to what I say and after listening to it do such a thing that does not destroy your Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)