Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.141.54-55h: "अग्निदेव देवताओं के मुख हैं, पुरोहित हैं, शुद्ध वस्तुओं को ही ग्रहण करते हैं और अत्यन्त प्रभावशाली हैं। तथापि, जैसे वे आयु के कारण सर्वभक्षी हो गए हैं, वैसे ही मैं ब्राह्मण होते हुए भी सर्वभक्षी हो जाऊँगा; अतः आप मुझे अपने धर्मानुसार ब्राह्मण ही मानें।" ॥54 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"अग्निदेव देवताओं के मुख हैं, पुरोहित हैं, शुद्ध वस्तुओं को ही ग्रहण करते हैं और अत्यन्त प्रभावशाली हैं। तथापि, जैसे वे आयु के कारण सर्वभक्षी हो गए हैं, वैसे ही मैं ब्राह्मण होते हुए भी सर्वभक्षी हो जाऊँगा; अतः आप मुझे अपने धर्मानुसार ब्राह्मण ही मानें।" ॥54 1/2॥
"Agnidev is the mouth of the gods, is the priest, accepts only pure things and is very influential. However, just as he has become omnivorous due to his age, similarly, even though I am a Brahmin, I will also become omnivorous; therefore, you should consider me a Brahmin as per your religion." ॥ 54 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥