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mahabharat 12.141.52: मेरी प्राणशक्ति क्षीण हो रही है। भूख के कारण मेरी श्रवणशक्ति नष्ट हो रही है। मैं दुबला-पतला हो गया हूँ। मेरी चेतना लुप्त हो रही है; अतः अब मुझे यह बोध नहीं रहता कि क्या खाने योग्य है और क्या नहीं॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.52 
अवसीदन्ति मे प्राणा: श्रुतिर्मे नश्यति क्षुधा।
दुर्बलो नष्टसंज्ञश्च भक्ष्याभक्ष्यविवर्जित:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
मेरी प्राणशक्ति क्षीण हो रही है। भूख के कारण मेरी श्रवणशक्ति नष्ट हो रही है। मैं दुबला-पतला हो गया हूँ। मेरी चेतना लुप्त हो रही है; अतः अब मुझे यह बोध नहीं रहता कि क्या खाने योग्य है और क्या नहीं॥ 52॥
 
‘My life force is getting weak. My hearing power is getting destroyed due to hunger. I have become thin. My consciousness is fading away; hence I no longer have the idea of ​​what is edible and what is not.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)