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mahabharat 12.141.49: उन्होंने बड़े आदर से हाथ जोड़कर, नेत्रों से आँसू बहाते हुए विश्वामित्र से कहा - 'ब्राह्मण! इस रात्रि के समय यह तुम्हारा क्या प्रयास है? तुम क्या करना चाहते हो?'॥49॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.141.49 
स विसृज्याश्रु नेत्राभ्यां बहुमानात् कृताञ्जलि:।
उवाच कौशिकं रात्रौ ब्रह्मन् किं ते चिकीर्षितम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने बड़े आदर से हाथ जोड़कर, नेत्रों से आँसू बहाते हुए विश्वामित्र से कहा - 'ब्राह्मण! इस रात्रि के समय यह तुम्हारा क्या प्रयास है? तुम क्या करना चाहते हो?'॥49॥
 
With great respect and folded hands, shedding tears from his eyes he said to Viswamitra, 'Brahmin, what is this attempt of yours at this time of the night? What do you want to do?'॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)