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mahabharat 12.141.47: आयुष्मान्! मैं विश्वामित्र हूँ। भूख से पीड़ित होकर यहाँ आया हूँ। हे उत्तम बुद्धि वाले चाण्डाल! यदि तुम ठीक से देख और समझ लो तो मुझे मत मारो।॥47॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.141.47 
विश्वामित्रोऽहमायुष्मन्नागतोऽहं बुभुक्षित:।
मा वधीर्मम सद्‍बुद्धे यदि सम्यक् प्रपश्यसि॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
आयुष्मान्! मैं विश्वामित्र हूँ। भूख से पीड़ित होकर यहाँ आया हूँ। हे उत्तम बुद्धि वाले चाण्डाल! यदि तुम ठीक से देख और समझ लो तो मुझे मत मारो।॥47॥
 
'Ayushman! I am Vishwamitra. I have come here suffering from hunger. O Chandala of excellent intellect! If you see and understand correctly then do not kill me.'॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)