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mahabharat 12.141.40: पहले उसे किसी निम्न स्तर के व्यक्ति के घर से भोजन चुराना चाहिए। यदि इससे भी काम न बने, तो अपने समान स्तर के व्यक्ति के घर से भोजन चुराना चाहिए। यदि वहाँ भी उसे अपनी इच्छित सिद्धि न मिले, तो उसे अपने से अधिक धर्मात्मा व्यक्ति के घर से भोजन चुराना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.141.40 
हीनादादेयमादौ स्यात् समानात् तदनन्तरम्।
असम्भवे वाऽऽददीत विशिष्टादपि धार्मिकात्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
पहले उसे किसी निम्न स्तर के व्यक्ति के घर से भोजन चुराना चाहिए। यदि इससे भी काम न बने, तो अपने समान स्तर के व्यक्ति के घर से भोजन चुराना चाहिए। यदि वहाँ भी उसे अपनी इच्छित सिद्धि न मिले, तो उसे अपने से अधिक धर्मात्मा व्यक्ति के घर से भोजन चुराना चाहिए।
 
‘First he should steal food from the house of an inferior person. If that does not work out, he should take food from the house of a person of his equal status. If he is unable to achieve his desired goal even there, he should steal food from the house of a person who is more pious than him. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)