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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.141.38 
स चिन्तयामास तदा स्तैन्यं कार्यमितो मया।
न हीदानीमुपायो मे विद्यते प्राणधारणे॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तब ऋषि ने सोचा, 'मुझे यहां से यह मांस चुरा लेना चाहिए; क्योंकि इस समय मेरे पास अपने प्राण बचाने का कोई अन्य उपाय नहीं है।' 38
 
Then the sage thought, 'I must steal this meat from here; because at this moment I have no other way to save my life.' 38
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)