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mahabharat 12.141.34: विश्वामित्र घर-घर भिक्षा माँगते फिरे, परन्तु उन्हें कहीं से भी मांस, अन्न, फल, मूल या कोई अन्य वस्तु न मिली॥34॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.141.34 
न च क्वचिदविन्दत् स भिक्षमाणोऽपि कौशिक:।
मांसमन्नं फलं मूलमन्यद् वा तत्र किञ्चन॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र घर-घर भिक्षा माँगते फिरे, परन्तु उन्हें कहीं से भी मांस, अन्न, फल, मूल या कोई अन्य वस्तु न मिली॥34॥
 
Visvamitra went from house to house begging, but he could not get meat, grain, fruit, roots or any other thing from anywhere.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)