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mahabharat 12.141.32: वहाँ अनेक मंदिर थे, जिनके भीतर उल्लुओं की ध्वनि गूंजती रहती थी। वहाँ के घर लोहे की घंटियों से सजे हुए थे और कुत्तों के झुंड उन घरों को घेरे रहते थे। 32.   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.32 
उलूकपक्षिध्वनिभिर्देवतायतनैर्वृतम्।
लोहघण्टापरिष्कारं श्वयूथपरिवारितम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अनेक मंदिर थे, जिनके भीतर उल्लुओं की ध्वनि गूंजती रहती थी। वहाँ के घर लोहे की घंटियों से सजे हुए थे और कुत्तों के झुंड उन घरों को घेरे रहते थे। 32.
 
There were many temples there, inside which the sound of owls kept echoing. The houses there were decorated with iron bells and packs of dogs surrounded those houses. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)