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mahabharat 12.141.23: ब्राह्मणों का नाश हो गया। रक्षक भी नष्ट हो गए। औषधियाँ (अनाज, फल आदि) भी नष्ट हो गईं। पृथ्वी पर सर्वत्र समस्त प्राणियों में अराजकता फैल गई॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.141.23 
हतविप्रा हतारक्षा प्रणष्टौषधिसंचया।
सर्वभूतरुतप्राया बभूव वसुधा तदा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों का नाश हो गया। रक्षक भी नष्ट हो गए। औषधियाँ (अनाज, फल आदि) भी नष्ट हो गईं। पृथ्वी पर सर्वत्र समस्त प्राणियों में अराजकता फैल गई॥ 23॥
 
The Brahmins were destroyed. The protectors were also destroyed. The medicinal plants (grains, fruits etc.) were also destroyed. The chaos of all living creatures was spreading everywhere on the earth.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)