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mahabharat 12.141.21: चोर, शस्त्र, राजा और भूखी प्रजा के उत्पात तथा परस्पर भय के कारण पृथ्वी का एक बड़ा भाग उजाड़ और निर्जन हो गया था ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.141.21 
क्वचिच्चोरै: क्वचिच्छस्त्रै: क्वचिद् राजभिरातुरै:।
परस्परभयाच्चैव शून्यभूयिष्ठनिर्जना॥ २१॥
 
 
अनुवाद
चोर, शस्त्र, राजा और भूखी प्रजा के उत्पात तथा परस्पर भय के कारण पृथ्वी का एक बड़ा भाग उजाड़ और निर्जन हो गया था ॥21॥
 
Due to disturbances caused by thieves, weapons, kings and hungry people, as well as mutual fear, a large portion of the earth had become desolate and uninhabited. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)