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mahabharat 12.141.20: हर तरफ हड्डियों के ढेर लगे थे। जीवों की चीखें चारों ओर फैल रही थीं। शहर के ज़्यादातर हिस्से तबाह हो गए थे और गाँव और घर जलकर खाक हो गए थे।   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.20 
अस्थिसंचयसंकीर्णा महाभूतरवाकुला।
शून्यभूयिष्ठनगरा दग्धग्रामनिवेशना॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हर तरफ हड्डियों के ढेर लगे थे। जीवों की चीखें चारों ओर फैल रही थीं। शहर के ज़्यादातर हिस्से तबाह हो गए थे और गाँव और घर जलकर खाक हो गए थे।
 
There were piles of bones everywhere. The great cries of the creatures were spreading everywhere. Most parts of the city were devastated and the villages and houses were burnt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)