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mahabharat 12.141.101: इस ज्ञान का आश्रय लेकर मनुष्य को सदैव जीवित रहने का प्रयत्न करना चाहिए; क्योंकि जीवित रहने वाले मनुष्य को पुण्य कर्म करने का अवसर मिलता है और वह कल्याण का भागी बनता है॥101॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  12.141.101 
एतां बुद्धिं समास्थाय जीवितव्यं सदा भवेत्।
जीवन् पुण्यमवाप्नोति पुरुषो भद्रमश्नुते॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
इस ज्ञान का आश्रय लेकर मनुष्य को सदैव जीवित रहने का प्रयत्न करना चाहिए; क्योंकि जीवित रहने वाले मनुष्य को पुण्य कर्म करने का अवसर मिलता है और वह कल्याण का भागी बनता है॥101॥
 
Taking recourse to this wisdom, one must always strive to remain alive; for a man who remains alive gets the opportunity to perform pious deeds and becomes a sharer in welfare.॥ 101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)