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mahabharat 12.141.100: हे राजन! इस प्रकार संकट में पड़े हुए और अपने प्राणों की रक्षा करने की इच्छा रखने वाले विद्वान पुरुष को आशा नहीं छोड़नी चाहिए, अपितु उपाय ढूँढ़ना चाहिए और संकटकाल में अपने को छुड़ाने के लिए सभी संभव उपाय करने चाहिए ॥100॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.141.100 
एवं विद्वानदीनात्मा व्यसनस्थो जिजीविषु:।
सर्वोपायैरुपायज्ञो दीनमात्मानमुद्धरेत्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस प्रकार संकट में पड़े हुए और अपने प्राणों की रक्षा करने की इच्छा रखने वाले विद्वान पुरुष को आशा नहीं छोड़नी चाहिए, अपितु उपाय ढूँढ़ना चाहिए और संकटकाल में अपने को छुड़ाने के लिए सभी संभव उपाय करने चाहिए ॥100॥
 
O King! A learned man who is in a crisis like this and wants to save his life should not lose hope but should find a solution and should use all possible means to free himself from the situation in an emergency. ॥100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)