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mahabharat 12.140.67: जो कभी कोमल और कभी कठोर होता है, वह अपने सब कार्य सिद्ध कर लेता है और शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त कर लेता है ॥67॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  12.140.67 
काले मृदुर्यो भवति काले भवति दारुण:।
प्रसाधयति कृत्यानि शत्रुं चाप्यधितिष्ठति॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
जो कभी कोमल और कभी कठोर होता है, वह अपने सब कार्य सिद्ध कर लेता है और शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त कर लेता है ॥67॥
 
'He who is soft at one time and tough at another time, he accomplishes all his tasks and even gains control over his enemies. ॥ 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)