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mahabharat 12.140.62: राजा को गिद्ध की तरह लंबी दृष्टि रखनी चाहिए, बगुले की तरह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, कुत्ते की तरह सतर्क रहना चाहिए और सिंह की तरह वीरता प्रदर्शित करनी चाहिए। उसे अपने मन में चिंता को स्थान नहीं देना चाहिए। उसे कौवे की तरह शंकालु रहना चाहिए और दूसरों की गतिविधियों पर नज़र रखनी चाहिए। जैसे साँप दूसरे के बिल में घुस जाता है, वैसे ही उसे शत्रु में छेद ढूँढ़कर उस पर आक्रमण करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  12.140.62 
गृध्रदृष्टिर्बकालीन: श्वचेष्ट: सिंहविक्रम:।
अनुद्विग्न: काकशङ्की भुजङ्गचरितं चरेत्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
राजा को गिद्ध की तरह लंबी दृष्टि रखनी चाहिए, बगुले की तरह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, कुत्ते की तरह सतर्क रहना चाहिए और सिंह की तरह वीरता प्रदर्शित करनी चाहिए। उसे अपने मन में चिंता को स्थान नहीं देना चाहिए। उसे कौवे की तरह शंकालु रहना चाहिए और दूसरों की गतिविधियों पर नज़र रखनी चाहिए। जैसे साँप दूसरे के बिल में घुस जाता है, वैसे ही उसे शत्रु में छेद ढूँढ़कर उस पर आक्रमण करना चाहिए।
 
‘The king should cast a long gaze like a vulture, focus on the target like a heron, be alert like a dog and display valour like a lion. He should not give place to anxiety in his mind. He should remain suspicious like a crow and observe the activities of others. Like a snake entering another's burrow, he should look for a hole in the enemy and attack him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)