Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.60: किसी भी कार्य को ठीक से पूरा किए बिना न छोड़ें और सदैव सतर्क रहें। शरीर में गड़ा हुआ काँटा यदि पूरी तरह से न निकाला जाए और उसका कुछ अंश शरीर में रह जाए, तो भी वह दीर्घकालिक समस्या उत्पन्न करता है।' 60. | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नासम्यक् कृतकारी स्यादप्रमत्त: सदा भवेत्।
कण्टकोऽपि हि दुश्छिन्नो विकारं कुरुते चिरम्॥ ६०॥
अनुवाद
किसी भी कार्य को ठीक से पूरा किए बिना न छोड़ें और सदैव सतर्क रहें। शरीर में गड़ा हुआ काँटा यदि पूरी तरह से न निकाला जाए और उसका कुछ अंश शरीर में रह जाए, तो भी वह दीर्घकालिक समस्या उत्पन्न करता है।' 60.
‘Never leave any task without completing it properly and always be cautious. Even if a thorn stuck in the body is not completely removed and some part of it remains in the body, it causes a long-term problem. 60.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥