Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.6: राजा शत्रुंजय शास्त्रों के अर्थ को अवश्य जानते थे। जब उन्होंने कर्तव्य का निर्णय करने के लिए प्रश्न उठाया, तब ब्राह्मण भारद्वाज कणिक ने ये उत्तम और युक्तिसंगत वचन कहने आरम्भ किए-॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा शत्रुंजय शास्त्रों के अर्थ को अवश्य जानते थे। जब उन्होंने कर्तव्य का निर्णय करने के लिए प्रश्न उठाया, तब ब्राह्मण भारद्वाज कणिक ने ये उत्तम और युक्तिसंगत वचन कहने आरम्भ किए-॥6॥
King Shatrunjaya was definitely aware of the meaning of the scriptures. When he raised the question for deciding the duty, then the Brahmin Bharadwaj Kanik started speaking these good and logical words -॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥