Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.56: सूखी अवस्था में वैर न करो और दोनों भुजाओं से नदी पार न करो । यह व्यर्थ और जीवन का नाश करने वाला कार्य है । यह कुत्ते के समान है जो गाय के सींग को चबाता है, जिससे उसके दाँत घिस जाते हैं और उसे रस नहीं मिलता ॥ 56॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न शुष्कवैरं कुर्वीत बाहुभ्यां न नदीं तरेत्।
अनर्थकमनायुष्यं गोविषाणस्य भक्षणम्।
दन्ताश्च परिमृज्यन्ते रसश्चापि न लभ्यते॥ ५६॥
अनुवाद
सूखी अवस्था में वैर न करो और दोनों भुजाओं से नदी पार न करो । यह व्यर्थ और जीवन का नाश करने वाला कार्य है । यह कुत्ते के समान है जो गाय के सींग को चबाता है, जिससे उसके दाँत घिस जाते हैं और उसे रस नहीं मिलता ॥ 56॥
‘Do not show hostility in a dry state and do not swim across a river using both arms. This is futile and a life-destroying act. This is like a dog chewing a cow's horn, which wears out its teeth and it does not get any juice.॥ 56॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥