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mahabharat 12.140.54: हमला करने के लिए तैयार होते समय भी मीठे शब्द बोलो, हमला करने के बाद भी मीठे शब्द बोलो, तलवार से दुश्मन का सिर काट देने के बाद भी उसके लिए विलाप करो और रोओ।   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.140.54 
प्रहरिष्यन् प्रियं ब्रूयात् प्रहृत्यैव प्रियोत्तरम्।
असिनापि शिरश्छित्त्वा शोचेत च रुदेत च॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हमला करने के लिए तैयार होते समय भी मीठे शब्द बोलो, हमला करने के बाद भी मीठे शब्द बोलो, तलवार से दुश्मन का सिर काट देने के बाद भी उसके लिए विलाप करो और रोओ।
 
‘Speak sweet words even while getting ready to attack, speak sweet words even after attacking, mourn and cry for the enemy even after cutting off his head with the sword.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)