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mahabharat 12.140.46: शत्रु के हित में भक्ति दिखाकर, मौन व्रत धारण करके, गेरुआ वस्त्र, जटा और मृगचर्म धारण करके उसमें विश्वास उत्पन्न करो और जब वह विश्वास प्राप्त कर ले, तब अवसर देखकर भूखे भेड़िये की भाँति शत्रु पर आक्रमण करो॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.140.46 
अवधानेन मौनेन काषायेण जटाजिनै:।
विश्वासयित्वा द्वेष्टारमवलुम्पेद् यथा वृक:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
शत्रु के हित में भक्ति दिखाकर, मौन व्रत धारण करके, गेरुआ वस्त्र, जटा और मृगचर्म धारण करके उसमें विश्वास उत्पन्न करो और जब वह विश्वास प्राप्त कर ले, तब अवसर देखकर भूखे भेड़िये की भाँति शत्रु पर आक्रमण करो॥ 46॥
 
‘By showing devotion to the welfare of the enemy, by taking a vow of silence, by wearing saffron clothes, matted hair and wearing deerskin, create confidence in him. And when he has gained confidence, then, seeing an opportunity, attack the enemy like a hungry wolf.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)