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mahabharat 12.140.42: छल-कपट से धर्म करने वाले, पापात्मा, चोर और संसार के काँटे जैसे लोग वहाँ वेश बदलकर आते हैं। उन सबको ढूँढ़कर कारागार में डाल दो अथवा उन्हें डराकर उनकी पाप-प्रवृतियों को शांत कर दो ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.140.42 
धर्माभिचारिण: पापाश्चौरा लोकस्य कण्टका:।
समागच्छन्ति तान् बुद्‍ध्वा नियच्छेच्छमयीत च॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
छल-कपट से धर्म करने वाले, पापात्मा, चोर और संसार के काँटे जैसे लोग वहाँ वेश बदलकर आते हैं। उन सबको ढूँढ़कर कारागार में डाल दो अथवा उन्हें डराकर उनकी पाप-प्रवृतियों को शांत कर दो ॥ 42॥
 
'People who follow deceitful religious practices, sinful souls, thieves and people who are a thorn in the world come there in disguise. Find them all and put them in prison or by scaring them, calm down their sinful tendencies. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)