Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.38: मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी इस दुःखद स्थिति से किसी भी प्रकार, चाहे वह कोमल हो या कठोर, छुटकारा पा ले। तत्पश्चात् शक्तिशाली बनकर पुनः धर्म के मार्ग पर चले॥ 38॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी इस दुःखद स्थिति से किसी भी प्रकार, चाहे वह कोमल हो या कठोर, छुटकारा पा ले। तत्पश्चात् शक्तिशाली बनकर पुनः धर्म के मार्ग पर चले॥ 38॥
‘A man should rescue himself from his miserable condition by whatever means possible, be it soft or hard. After this, he should become powerful and once again follow the path of righteousness.॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥