Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.140.35: भविष्य में आनेवाले संकटों को पहले ही जान लो और जो भय उत्पन्न हो, उसे दबाने का प्रयत्न करो। दबा हुआ भय पुनः बढ़ सकता है, अतः समझ लो कि वह अभी गया नहीं है (और ऐसा सोचकर सावधान रहो)।॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.140.35 
अनागतं विजानीयाद् यच्छेद् भयमुपस्थितम्।
पुनर्वृद्धिभयात् किंचिदनिवृत्तं निशामयेत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
भविष्य में आनेवाले संकटों को पहले ही जान लो और जो भय उत्पन्न हो, उसे दबाने का प्रयत्न करो। दबा हुआ भय पुनः बढ़ सकता है, अतः समझ लो कि वह अभी गया नहीं है (और ऐसा सोचकर सावधान रहो)।॥35॥
 
‘Try to know in advance the troubles that are going to come in the future and try to suppress the fears that arise. The suppressed fear may increase again, so understand that it has not yet gone away (and remain alert by thinking so).॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)