Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.31: बुद्धिमान राजा को उस वृक्ष के समान होना चाहिए जिसमें फूल तो बहुत होते हैं, परन्तु फल नहीं लगते। यदि उस पर फल भी लगते हों, तो उस पर चढ़ना बड़ा कठिन होता है। वह कच्चा होता है, परन्तु पके वृक्ष के समान दिखता है और कभी जीर्ण-शीर्ण नहीं होता।॥31॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुपुष्पित: स्यादफल: फलवान् स्याद् दुरारुह:।
आम: स्यात् पक्वसंकाशो न च शीर्येत कस्यचित्॥ ३१॥
अनुवाद
बुद्धिमान राजा को उस वृक्ष के समान होना चाहिए जिसमें फूल तो बहुत होते हैं, परन्तु फल नहीं लगते। यदि उस पर फल भी लगते हों, तो उस पर चढ़ना बड़ा कठिन होता है। वह कच्चा होता है, परन्तु पके वृक्ष के समान दिखता है और कभी जीर्ण-शीर्ण नहीं होता।॥31॥
‘A wise king should be like a tree which has many flowers but no fruits. Even if it bears fruits, it is very difficult to climb it. It is unripe but looks like a ripe tree and it never becomes dilapidated.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥