Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.140.27: ‘राजा को बाँस का धनुष बनाना चाहिए, हिरण की तरह जागकर सोना चाहिए, यदि अंधे रहने का समय हो तो अंधे का पद ग्रहण करना चाहिए और परिस्थिति के अनुसार बहरे का पद भी स्वीकार करना चाहिए॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.140.27 
कुर्यात् तृणमयं चापं शयीत मृगशायिकाम्।
अन्ध: स्यादन्धवेलायां बाधिर्यमपि संश्रयेत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘राजा को बाँस का धनुष बनाना चाहिए, हिरण की तरह जागकर सोना चाहिए, यदि अंधे रहने का समय हो तो अंधे का पद ग्रहण करना चाहिए और परिस्थिति के अनुसार बहरे का पद भी स्वीकार करना चाहिए॥ 27॥
 
‘The king should make a bow of bamboo, he should sleep alert like a deer, if the time is suitable for him to remain blind then he should assume the position of a blind man and according to the situation he should also accept the position of a deaf man.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)