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mahabharat 12.140.21: राजा को कोयल, सूअर, सुमेरु पर्वत, खाली घर, अखरोट और प्रिय मित्र के उत्तम गुणों या लक्षणों का उपयोग करना चाहिए ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.140.21 
कोकिलस्य वराहस्य मेरो: शून्यस्य वेश्मन:।
नटस्य भक्तिमित्रस्य यच्छ्रेयस्तत् समाचरेत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजा को कोयल, सूअर, सुमेरु पर्वत, खाली घर, अखरोट और प्रिय मित्र के उत्तम गुणों या लक्षणों का उपयोग करना चाहिए ॥21॥
 
'The king should use the best qualities or characteristics of the cuckoo, the pig, Mount Sumeru, the empty house, the nut and the beloved friend.' 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)