Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.20: ‘अनेक प्रकार की कामनाओं वाले मनुष्य को कृतघ्न मनुष्य से न तो आर्थिक सम्बन्ध जोड़ना चाहिए और न ही किसी का कार्य पूर्ण करना चाहिए, क्योंकि स्वार्थी (अपने उद्देश्य की प्राप्ति की इच्छा रखने वाला) मनुष्य बार-बार काम में लिया जा सकता है; किन्तु जिसका उद्देश्य सिद्ध हो जाता है, वह सहायता करने वाले की उपेक्षा करता है; इसलिए दूसरों के समस्त कार्य (जो स्वयं करने चाहिए) अधूरे छोड़ देने चाहिए॥ 20॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘अनेक प्रकार की कामनाओं वाले मनुष्य को कृतघ्न मनुष्य से न तो आर्थिक सम्बन्ध जोड़ना चाहिए और न ही किसी का कार्य पूर्ण करना चाहिए, क्योंकि स्वार्थी (अपने उद्देश्य की प्राप्ति की इच्छा रखने वाला) मनुष्य बार-बार काम में लिया जा सकता है; किन्तु जिसका उद्देश्य सिद्ध हो जाता है, वह सहायता करने वाले की उपेक्षा करता है; इसलिए दूसरों के समस्त कार्य (जो स्वयं करने चाहिए) अधूरे छोड़ देने चाहिए॥ 20॥
‘A person having many kinds of desires should not establish economic relations with an ungrateful person, nor should he complete anyone's work, because a person who is selfish (desiring to achieve his purpose) can be used again and again; but one whose purpose is achieved, ignores the person who has helped him; therefore all the works of others (which should be done by oneself) should be left incomplete.॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥