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mahabharat 12.140.2: भीष्मजी बोले- भरतनन्दन! ऐसे समय में मैं तुम्हें संकट काल की नीति बता रहा हूँ, जिसके अनुसार भूमिपति को दया का परित्याग करके भी उचित आचरण करना चाहिए॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.140.2 
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि नीतिमापत्सु भारत।
उत्सृज्यापि घृणां काले यथा वर्तेत भूमिप:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले- भरतनन्दन! ऐसे समय में मैं तुम्हें संकट काल की नीति बता रहा हूँ, जिसके अनुसार भूमिपति को दया का परित्याग करके भी उचित आचरण करना चाहिए॥2॥
 
Bhishmaji said – Bharatnandan! At such a time, I am telling you the policy of the crisis period, according to which the land owner should behave appropriately even after abandoning his mercy. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)