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mahabharat 12.140.18: जब तक समय बदलकर तुम्हारे अनुकूल न हो जाए, तब तक चाहे शत्रु को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़े, तो ले जाओ; परन्तु जब अनुकूल समय आ जाए, तो उसे ऐसे नष्ट कर दो, जैसे घड़े को पत्थर पर पटकने से वह टूट जाता है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.140.18 
वहेदमित्रं स्कन्धेन यावत्कालस्य पर्यय:।
प्राप्तकालं तु विज्ञाय भिन्द्याद् घटमिवाश्मनि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब तक समय बदलकर तुम्हारे अनुकूल न हो जाए, तब तक चाहे शत्रु को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़े, तो ले जाओ; परन्तु जब अनुकूल समय आ जाए, तो उसे ऐसे नष्ट कर दो, जैसे घड़े को पत्थर पर पटकने से वह टूट जाता है॥18॥
 
‘Until the time changes and becomes favourable to you, even if you have to carry the enemy on your shoulders, do that; but when the favourable time comes, destroy him in the same way as a pot is broken by throwing it on a stone.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)