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mahabharat 12.140.17: धन की इच्छा रखने वाले राजा को चाहिए कि जब अवसर मिले, तो शत्रु के सामने हाथ जोड़कर, शपथ लेकर, उसे आश्वासन देकर, उसके चरणों में सिर झुकाकर उससे बात करे। इतना ही नहीं, उसे साहस देकर उसके आँसू भी पोंछ दे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.140.17 
अञ्जलिं शपथं सान्त्वं प्रणम्य शिरसा वदेत्।
अश्रुप्रमार्जनं चैव कर्तव्यं भूतिमिच्छता॥ १७॥
 
 
अनुवाद
धन की इच्छा रखने वाले राजा को चाहिए कि जब अवसर मिले, तो शत्रु के सामने हाथ जोड़कर, शपथ लेकर, उसे आश्वासन देकर, उसके चरणों में सिर झुकाकर उससे बात करे। इतना ही नहीं, उसे साहस देकर उसके आँसू भी पोंछ दे॥17॥
 
‘A king who desires wealth should, when he finds an opportunity, fold his hands before his enemy, take an oath, assure him and talk to him with his head bowed at his feet. Not only this, he should even wipe away his tears by giving him courage.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)