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mahabharat 12.140.16: यदि किसी संकट के कारण किसी व्यक्ति की बुद्धि शोक से भर गई हो, तो उसे पूर्वकाल की कथाएँ (राजा नल और भगवान राम आदि की जीवन कथाएँ) सुनाकर सान्त्वना दो, यदि किसी व्यक्ति की बुद्धि ठीक न हो, तो उसे भविष्य में लाभ की आशा दो और यदि किसी विद्वान् व्यक्ति को तुरंत धन आदि देकर उसे शान्त करो॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.140.16 
यस्य बुद्धि: परिभवेत् तमतीतेन सान्त्वयेत्।
अनागतेन दुष्प्रज्ञं प्रत्युत्पन्नेन पण्डितम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यदि किसी संकट के कारण किसी व्यक्ति की बुद्धि शोक से भर गई हो, तो उसे पूर्वकाल की कथाएँ (राजा नल और भगवान राम आदि की जीवन कथाएँ) सुनाकर सान्त्वना दो, यदि किसी व्यक्ति की बुद्धि ठीक न हो, तो उसे भविष्य में लाभ की आशा दो और यदि किसी विद्वान् व्यक्ति को तुरंत धन आदि देकर उसे शान्त करो॥ 16॥
 
'If a person's intellect is filled with grief due to a crisis, then console him by narrating stories of the past (life stories of King Nala and Lord Rama etc.), if a person's intellect is not good, then give him hope of benefits in the future and if a learned person is immediately given money etc., then pacify him.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)