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mahabharat 12.140.14: शत्रु के साथ संधि करके भी उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। बुद्धिमान पुरुष को अपना कार्य पूरा करके शीघ्र ही उस स्थान को छोड़ देना चाहिए।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.140.14 
सपत्नसहिते कार्ये कृत्वा सन्धिं न विश्वसेत्।
अपक्रामेत् तत: शीघ्रं कृतकार्यो विचक्षण:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
शत्रु के साथ संधि करके भी उस पर विश्वास नहीं करना चाहिए। बुद्धिमान पुरुष को अपना कार्य पूरा करके शीघ्र ही उस स्थान को छोड़ देना चाहिए।॥14॥
 
‘Do not trust the enemy even after entering into an agreement with him. After accomplishing his task, a wise man should quickly leave the place.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)