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mahabharat 12.140.11: विद्वान पुरुष को चाहिए कि पहले शत्रु की जड़ उखाड़ फेंके, तत्पश्चात् उसके सहायकों और समर्थकों को भी उसी मूल मार्ग का अनुसरण करना चाहिए ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.140.11 
मूलमेवादितश्छिन्द्यात् परपक्षस्य पण्डित:।
तत: सहायान् पक्षं च मूलमेवानुसाधयेत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष को चाहिए कि पहले शत्रु की जड़ उखाड़ फेंके, तत्पश्चात् उसके सहायकों और समर्थकों को भी उसी मूल मार्ग का अनुसरण करना चाहिए ॥11॥
 
'A learned man should first uproot the enemy's roots. After that, his assistants and supporters should also follow the path of that origin. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)