Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.14.34-35h: जो मूर्ख ऐसे काम करता है, उसका कभी कल्याण नहीं होता। जो पागल होकर कुमार्ग पर चलने लगता है, उसका उपचार धूपबत्ती की सुगंध देकर, सिद्ध नेत्रों का लेप लगाकर, सुंघनी सुंघाकर या कोई अन्य औषधि खिलाकर करना चाहिए। 34 1/2 | mahabharat अध्याय 12.14: द्रौपदीका युधिष्ठिरको राजदण्डधारणपूर्वक पृथ्वीका शासन करनेके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुरुते मूढ एवं हि य: श्रेयो नाधिगच्छति।
धूपैरञ्जनयोगैश्च नस्यकर्मभिरेव च॥ ३४॥
भेषजै: स चिकित्स्य: स्याद् य उन्मार्गेण गच्छति।
अनुवाद
जो मूर्ख ऐसे काम करता है, उसका कभी कल्याण नहीं होता। जो पागल होकर कुमार्ग पर चलने लगता है, उसका उपचार धूपबत्ती की सुगंध देकर, सिद्ध नेत्रों का लेप लगाकर, सुंघनी सुंघाकर या कोई अन्य औषधि खिलाकर करना चाहिए। 34 1/2
The fool who does such things never attains welfare. The one who goes mad and starts walking on the wrong path should be treated by giving him the fragrance of incense, applying Siddha eye ointment to his eyes, making him smell snuff or by feeding him some other medicine. 34 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥