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श्लोक  12.14.21 
जम्बूद्वीपो महाराज नानाजनपदैर्युत:।
त्वया पुरुषशार्दूल दण्डेन मृदित: प्रभो॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे राजन! हे नरसिंह! आपने अनेक जनपदों से युक्त इस जम्बूद्वीप को अपने दण्ड से रौंद डाला है।
 
O Lord! O King! O lion of men! You have trampled this Jambudweep with your staff, which consists of several janapadas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)