Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.14.17: जिसमें क्षमा और क्रोध दोनों ही समयानुसार प्रकट होते हैं, जो दान देता और लेता है, जो शत्रुओं को भयभीत करने और शरणागतों को अभय देने की शक्ति रखता है, जो दुष्टों को दण्ड देता है और दीन-दुखियों पर दया करता है, वह धर्म को जानने वाला कहा जाता है ॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.14: द्रौपदीका युधिष्ठिरको राजदण्डधारणपूर्वक पृथ्वीका शासन करनेके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्मिन् क्षमा च क्रोधश्च दानादाने भयाभये।
निग्रहानुग्रहौ चोभौ स वै धर्मविदुच्यते॥ १७॥
अनुवाद
जिसमें क्षमा और क्रोध दोनों ही समयानुसार प्रकट होते हैं, जो दान देता और लेता है, जो शत्रुओं को भयभीत करने और शरणागतों को अभय देने की शक्ति रखता है, जो दुष्टों को दण्ड देता है और दीन-दुखियों पर दया करता है, वह धर्म को जानने वाला कहा जाता है ॥17॥
He in whom forgiveness and anger both manifest according to the time, who gives and takes charity, who has the power to frighten the enemies and give protection to those who seek refuge, who punishes the wicked and is merciful to the poor, he is called a knower of Dharma. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥